अतीत के संस्कारों को पूरी तरह से मिटाना मुश्किल है, यह दो मुँहे जोंक की तरह, एक मुँह से पीछा छुड़ाओं तो दूसरे मुँह से जकड़ लेता है।
अतीत के संस्कारों को पूरी तरह से मिटाना मुश्किल है, यह दो मुँहे जोंक की तरह, एक मुँह से पीछा छुड़ाओं तो दूसरे मुँह से जकड़ लेता है।